बात इसी सोमवार की
है | पंचायती राज विभाग के ई पंचायत मिशन मोड प्रोजेक्ट के तहत नेशनल पंचायत पोर्टल
और लोकल गवर्नमेंट डायरेक्टरी के एप्लीकेशन का प्रशिक्षण लेने हेतु पटना जाना था |
ट्रेन रात को सवा ग्यारह बजे थी, इसलिए दस पैंतालिस में ही बेगुसराय स्टेशन पर आ
गया | टिकट कटाकर प्लेटफार्म पर आ गया | प्लेटफार्म पर इक्के दुक्के लोग ही थे, कुछ
सोये हुए थे, और कुछ मेरी तरह इधर उधर टहल रहे थे | टहलते टहलते मैं रेलवे आहार
खान- पान सेवा के स्टाल वाले से पानी का बोतल खरीदकर पास वाली बेंच पर आकर बैठ गया
| रेलवे आहार के स्टाल वाला व्यक्ति एक बच्चे से बड़ी देर से बात कर रहा था, चूंकि
रात के 11 बज गए थे, इसलिए किसी ग्राहक के आने की उम्मीद नहीं थी | स्टाल वाला बड़ी
इत्मीनान से बच्चे से बातें कर रहा था | बच्चे की उम्र कोई 9-10 साल की होगी |
मैले कुचैले कपडे पहने और पैंट को नीचे से घुटनों तक फोल्ड किये हुए वह लड़का ट्रेनों
में घूम-घूम कर दालमोट (नमकीन) बेचा करता था | मेरे अगल बगल कोई था नहीं तो उस
स्टाल वाले और उस बच्चे की बातें सुनने लगा | बच्चा अपनी छोटी से उम्र के कड़वे अनुभव
बता रहा था | बता रहा था की उसके पिता ने उसकी मां और उसको छोड़ दिया है | ट्रेनों
में घूम घूमकर वह दालमोट बेचकर अपनी और अपनी मां का गुज़ारा करता है | वह रात को
किसी प्लेटफार्म पर ही सो जाया करता है | अभी दो दिन से उसकी मां को बुखार है, दवा
देने से मां का बुखार ठीक नहीं हुआ है तो उसने इंजेक्शन दिलवाया है | स्टाल वाले
के पूछने पर बच्चे ने बताया की उसने आज कुछ नहीं खाया है | इस बच्चे की पहाड़ सी
समस्याओं को सुनकर एक बात याद आई जो कहीं सुना था की “जिसका कोई नहीं होता है उसका
भगवान् होता है” | सोचने लगा की भगवान् भी क्यों इतनी परीक्षा ले रहे हैं इसकी,
छोटा बच्चा तो है वो | जब उसने स्टाल वाले को अपनी टूटी हुयी भाषा में कहा की भैया
मेरा घर उजड़ गया है ये सुनकर मेरी आँख पूरी गीली हो गयी, फिर भी अपनी आँख झुकाकर
उसकी बातें सुन रहा था | सोचने लगा की कहाँ गए बाल श्रम उन्मूलन का पहाड़ा पढ़ने वाले
लोग, आओ और इसकी मदद करो | अब इसकी बात सुनी नहीं जा रही थी, ये रात सच में किसी
काली रात की तरह लगने लगी थी, ऐसा लग रहा था की मिथकों से कोई दानव निकल कर तमाम
कमजोरों को रगेद रहा हो |
इतने में अनाउंसमेंट
हुयी की न्यू जलपाईगुडी से चलकर दानापुर तक को जाने वाली कैपिटल एक्सप्रेस
प्लेटफार्म क्रमांक संख्या 01 पर आ रही है | ट्रेन आई और मैं चढ़ गया, चढ़ कर पलट कर
देखा तो बच्चा अपने मैले कुचैले से गमछे में दालमोट के पैकेटों को समेट रहा है |