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Saturday, 24 December 2016

यादों का कोहरा


सर्दियों में जल्दी छुप जाने वाली शामें यादों की तहों को कितना उघेरती हैं न ! मानो जैसे हाथों से बुने किसी स्वेटर के एक सिरे में खरोंच लग गयी हो, और उसकी उन परत दर परत खुलती ही जा रही हो।

पता है तुम्हें ..... दिल सुबह से ही तुम्हारी यादों का पिटारा खोल के बैठ जाता है, और दिन भर मुस्कुराते मुस्कुराते शाम को ये किसी रूठे बच्चे की तरह बिलकुल गुमसुम हो जाता है। सर्दियों का मौसम अब मेरा फेवरेट नहीं रहा।  ग़ुलाबी सर्दी भी अब ग़ुलाबी नहीं लगती, यूँ लगता है किसी घटाटोप कोहरे ने जैसे मेरे हिस्से की ग़ुलाबी धूप पर अपना डेरा जमा लिया है। अब तो गर्म चाय भी ईश्क़ में  बर्फ की तरह जम चुके दिल को पिघला नहीं पा रही। तुम्ही कहती थी न ज़्यादा चाय अवॉयड करो। लो देखो ! चाय अब इतनी भी अच्छी नहीं लगती मुझे। ऑफिस में भी टेबल पर पड़ी चाय के कप में से उठते भाप को बस चुपचाप घूरता रहता हूँ।

आजकल तो क्रिसमस 🎄🎄 और न्यू ईयर 🎉🎉🎈🎈का टाइम है, पर देखो न तुम्हारी यादें कैसे कैसे पोस्ट करवा रही है। मेरा दिल भी राहुल गांधी की तरह हो गया है। बिलकुल पप्पू। राहुल गांधी आजकल शायरियाँ कर रहे हैं, और मैं ये पोस्ट।

कल तो क्रिसमस है न !! सुना है कि किसी बर्फ वाले देश फ़िनलैंड में कोई सैंटा 🎅🎅रहता है, जो सबकी विशेज़ पूरी कर देता है। तो मेरी विश क्यूँ पूरी नहीं की उसने !! 🤔 शायद तुमने अपनी क्रिसमस गिफ़्ट में किसी और को मांग लिया था। :)