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Monday, 22 December 2014

बिहार विधानसभा चुनाव में अबकी बार किसकी सरकार ?

      विधानसभा चुनावों का सीजन है | जम्मू कश्मीर और झारखण्ड में सभी चरणों में चुनाव समाप्त हो चुके हैं | चुनावों के परिणाम कल आने हैं | बिहार के बहुप्रतीक्षित चुनाव में अभी कुछ समय बाकी है | जम्मू कश्मीर और झारखंड में हो चुके चुनावों के परिणामों का इंतज़ार तमाम राजनीतिक दिग्गज खासकर भाजपा के नेतागण ठीक स्कूल के उन टौपर बच्चों की तरह कर रहे हैं जो अपने आने वाले रिजल्ट के अच्छे परिणामों को लेकर आशान्वित होते हैं | मोदी लहर का तो पता नहीं पर दिसम्बर के इस सर्द महीने में समूचा उत्तर भारत शीत लहर की चपेट में है, लेकिन देश का राजनीतिक माहौल खासकर विधानसभा चुनावों वाले राज्यों जैसे झारखण्ड और बिहार में इस वक़्त काफी गरम है | तमाम राजनीतिक दलों और संगठनों के बड़े नेताओं से लेकर चिरकुट नेता (छुटभैया नेता) आपको पार्टी कार्यालय में राजनीतिक बहसबाजी करते मिल जायेंगे | कुछ भी हो केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद राज्यों में हो रहे या हो चुके विधानसभा चुनावों में भाजपा का पलड़ा थोडा भारी ही है | महाराष्ट्र विधानसभा और हरियाणा विधान सभा चुनाव के नतीजे इसके ताज़ा उदाहरण हैं | हो भी क्यों ना मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की केंद्र में बन चुकी बहुमत वाली सरकार ने राज्यों में मृतप्राय भाजपा संगठनों में प्राण फूँक दिए हैं | राज्यों में लम्बे समय से क्षेत्रीय पार्टियों के वर्चस्व को देखते हुए राज्यों में भाजपा की सफलता कुछ सोचने पर मजबूर करती है | क्या इन राज्यों के लोग क्षेत्रीय पार्टियों द्वारा किये गए वायदों और आश्वासनों तथा परिवारवाद की राजनीती से उकता गए हैं या फिर देश की राजनीती एक नयी ऐतिहासिक दिशा में जा रही है, जिसके गवाह इस पीढ़ी के हम सभी लोग होंगे | बहुत दूर ले के चले गए आपको, थोडा नीचे आ जाइए, बिहार की वर्तमान राजनीती पर कुछ प्रकाश डालते हैं |


     
कभी एक दुसरे के धुर विरोधी रहे नितीश और लालू लोकसभा चुनाव में चोट खाकर अब एक हो चुके हैं | सिर्फ नितीश की जदयु और लालू की आरजेडी ही नहीं कई क्षेत्रीय दल एकजुट हो चुके हैं, एचडी देवेगौडा भी हैं साथ में और इनके अगुआ हैं मुलायम सिंह यादव | मोदीजी ने सच ही कहा था गठबंधन कर के दिल्ली में सरकार बनायीं जाती है, लेकिन अब विपक्ष के लिए पार्टियों को गठबन्धन करना पड़ेगा | बात सही साबित हुयी | आज दिल्ली के जंतर मंतर पर जनता परिवार का विशाल महाधरना हुआ है | सारे दिग्गज जुटे हैं लालू यादव, नितीश कुमार, शरद यादव, मुलायम सिंह यादव, एचडी देवेगौडा | वो कहते हैं न अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता, भाड़ फोड़ने के लिए चने जुड़ रहे हैं | मुद्दे से फिर भटक गए हैं, आइये फिर से बिहार पर आते हैं |


      लोकसभा चुनाव में नितीश कुमार की हार पर बिहार के लोग कहते पाए जाते हैं की इन्होने सिर्फ अति पिछड़ों और महादलितों की राजनीती की हैं, और यही इनकी हार का प्रमुख कारण बना हैं | क्या सच में जातिवाद बिहार की राजनीती पर हावी है ? क्या यहाँ के लोग इस बार के विधानसभा चुनाव में इससे ऊपर उठकर वोट देंगे ? तो जवाब है, नहीं | यहाँ की राजनीती में अभी बहुत वक़्त है | ऐसा नहीं की सिर्फ सुशासन बाबू (नितीश कुमार) और सेकुलर बाबू (लालू यादव) ही जातिवाद की राजनीती करते हैं, भाजपा ने भी लोकसभा चुनावों में इसका फायदा उठाया है | अगर ऐसा नहीं होता तो पासवानजी की लोजपा को भाजपा गठबंधन में शामिल नहीं किया जाता | बहुत ही स्पष्ट है की चुनावों में जीत के कई पैंतरें हैं और जातिवाद की राजनीति पहले नंबर पर है | पर क्या जातिवाद की राजनीती पर ही चुनाव जीते जाते हैं ? राष्ट्रीय परिदृश्य पर देखें और लोकसभा चुनावों में भाजपा की जीत का अवलोकन करें तो पायेंगे की भाजपा की जीत के कई फैक्टर हैं उनमे प्रमुख हैं जनमत बनाने में सोशल मीडिया की भूमिका, संगठन शक्ति और अच्छे प्रवक्ताओं की फौज | जेडीयू और आरजेडी के पास इनकी घोर कमी है | ऐसा नहीं है नितीश ने बिहार में काम नहीं किया है | लेकिन उनके किये कामों को नारों में बदलने के लिए एक कुशल टीम की आवश्यकता है जो की फिलवक्त जेडीयू के पास नहीं हैं | सच बात यही है की नितीश अपने सुशासन को नहीं बेच पा रहे हैं, क्योंकि कहाँ हैं वो बड़े बड़े होर्डिंग जो की नितीश के सुशासन के दावों को सच साबित करें | और नितीश अभी तक सिर्फ फेसबुक पर ही अपने मन की बात कहते आये हैं, उनका अभी ट्विटर, इन्स्टाग्राम जैसे सोशल साइट्स पर आना बाकी हैं |
      ऐसे में नए साल में होने वाले बिहार विधान सभा चुनावों में भाजपा की सरकार बनेगी या महागठबंधन की ये तो आने वाले समय में पता चल ही जायेगा, दोनों के बीच कड़ी टक्कर होनी है| महागठबंधन तथा भाजपा के समर्थक दोनों अपने अपने जीत के दावे कर रहे हैं | ऐसे में सिर्फ यही कहेंगे की कम से कम बिहार की राजनीती में अंदाज़े लगाने बंद कर दीजिये, क्योंकि पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त |

      

Friday, 5 December 2014

एक्शन जैक्सन

टाइटल पढ़ के कन्फुजियाएगा मत, फिल्म की समीक्षा नहीं कर रहे हैं | आइये फिल्म को छोड़कर रियल लाइफ के एक्शन की बात करते हैं | इन दिनों हरियाणा के रोहतक की दो बहनें अपने एक्शन के लिए काफी चर्चा में हैं | कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया पर इन दोनों बहनों का बस में दो लड़कों की सिंघम स्टाइल में बेल्ट से पिटाई का विडियो बहुत चर्चित हुआ | विडियो इतना ज्यादा वायरल हुआ की मीडिया में आ गया, बस फिर क्या था हमारे देश के महान मीडिया ने इस खबर को ब्रेकिंग न्यूज़ बना दिया और दोनों बहनों को मर्दानी | सभी चैनलों पर ये खबर इतना चला की हरियाणा सरकार ने इन बहनों की बहादुरी को देखते हुए आगामी 26 जनवरी के समारोह में 31000 रुपये से पुरस्कृत करने का ऐलान कर दिया, और बस के ड्राईवर और कंडक्टर को सस्पेंड कर दिया | ज्यादा समय नहीं गुज़रा था की तभी इन दोनों बहनों का एक और विडियो सामने आ गया, इसमें भी दोनों बहनें किसी लड़के को पीटने की महती कृपा कर रहीं थी | कहानी में ट्विस्ट तब आया जब बस में बैठे चश्मदीद गवाह लोग लड़कियों का पक्ष न लेकर लड़कों का पक्ष लेने लगे और कहने लगे की बस में गलती लड़कों की नहीं थी, बल्कि लड़कियों की थी | लड़के तो किसी बूढी औरत का टिकेट लेकर उन बूढी औरत को बस में बिठाए थे | और इन दोनों लड़कियों को बस में खराब सीट मिली थी, ये लडकियां उन कथित बूढी औरत को हटने को बोल रही थी, कह रही थी की ये सीट हमारी है, बस लड़के इसी का विरोध करने लगे थे | फिर भी बूढी औरत झगडा नहीं चाहती थी, तो वो बस में पड़े एक टायर के ऊपर बैठ गयी, अब उन दो लड़कियों में से एक लड़की इन दो लड़कों में से एक लड़के को अपने सीट में से उठने के लिए बोली, बस तभी झगडा शुरु हुआ |
     पिटने वाले दोनों लड़कों का आर्मी में सिलेक्शन हो चूका था, सिर्फ जॉइनिंग बाकी थी, सरकार ने इन दोनों लड़कों के आर्मी में नियुक्ति पर फिलवक्त रोक लगा दिया है | अब मीडिया ने पलटी मारी है, और दोनों बहनों और लड़कों को सामने लाकर 1 घंटे का स्पेशल एपिसोड चला रही है | इससे क्या होगा, अब लड़कों और लड़कियों ने ‘किनले मिनरल वाटर’ तो पिया नहीं है, जिसकी बूँद-बूँद में सच्चाई है, और सच का पता चल जायेगा | मीडिया को किसी भी खबर को एकतरफा दिखाने से पहले ठीक से पड़ताल कर लेनी चाहिए |

    लडकियों को कहीं भी छेड़ना या फब्तियां कसना निश्चय ही अपराध है | सभ्य समाज में कतई स्वीकार्य नहीं है | बस कहना ये है की इस घटना की अच्छे से जांच हो, सच्चाई सामने आये और किसी निरपराध को इसकी सजा न मिले |
     ठीक है चलते हैं, रविश सर की तरह नहीं कहेंगे की आप भी चलते रहिये | बल्कि कहेंगे की चलिए, फिरिए, दौडिए, खेलिए-कूदिये, गाइए-नाचिये, and do whatever you want to do man, बस किसी लड़की को छेडिएगा मत | :D