याद है तुम्हें.... हम एक दिन यूँ ही गप्पे लड़ा रहे थे तब मैंने यूँ ही मज़ाक में तुमसे कहा चलो न हम लोग मिलके कहीं चाय की टपरी खोलते हैं। मुस्कुराते हुए तुमने भी कह दिया हाँ चलो खोलते हैं। फिर जब मैंने पुछा की अच्छा ये बताओ हमलोग चाय की टपरी का नाम क्या रखेंगे तो तुमने तपाक से कहा........ बंजारों की चाय। मैं कितना जोर से हँसा था।
फिर से जब उन पलों को याद करता हूँ तो वैसी ही मुस्कराहट
मेरे चेहरे पर ऐसे फ़ैल जाती है मानो तुमने अपने हाथों से मेरे दोनों गालों पर
चिकोटी काट के कहा हो की “मुस्कुराओ............खुश रहा करो मिस्टर बंजारा” |
तुमने कहा था न, कि जब भी मन उदास हो एक चॉकलेट खा लिया करो, दिल खुश हो जाएगा | तो
सुनो.....तुम्हारी बात मान ली है मैंने, अब जब भी दिल उदास होता है, तुम्हें याद
कर एक चॉकलेट पक्का खा लेता हूँ |
उस समय की बेचैनी........ सुबह
साढ़े चार बजे तक का नींद न आना, ये सब मुझे अब भी बहुत डरा देती है | You know तुम्हें पाया भी नहीं था........
और तुम्हे खो देने भर का ख़याल मुझे ऐसे डराता था, जैसे राजस्थान टूरिज्म वाले ऐड में भानगढ़ के किले में दिल्ली का सैलानी वह लड़का डर जाता है। उसकी आंखों में खौंफ देखो। तुम्हें बिना पाए खो देने का डर मुझे बेचैन
किये था |
एक दिन तुमने तो कह दिया की मैं तुम्हारी ज़रुरत नहीं हूँ, की मैं नहीं हूँगी तो तुम जी नहीं पाओगे। पर मैं तुम्हे कैसे कहता की तुम मेरी respiratory सिस्टम हो, गर तुम नहीं होगी तो साँस नहीं आएगी मुझे। कैसे वैनिश कर देता इन फीलिंग्स को | तुम्हें पता है ? कि पहला प्यार पहले-पहले विडियो गेम की तरह होता है जिसका मोह छूटे नहीं छूटता |
पर तुम बिलकुल परेशान मत
होना.........दसरथ काका (मांझी) कह गए हैं कि “प्रेम में बहुते बल होता है बबुआ।“ मुझे भी यही लगता है की अंत तक प्रेम करना Is
more important. प्रेम को पा लेना प्रेम की पराकाष्ठा नहीं। जीवन की पहली-पहली इन भावनाओं को अपनी यादों
में हमेशा सहेजकर रखूँगा मैं, जैसे कोई छोटा बच्चा अपने खिलौनों को सहेजकर रखता
है, अपने से दूर जाने नहीं देता |
You know कभी-कभी सोचता
हूँ कि क्या करता मैं कि तुम्हें ये यकीन आ जाता कि मेरी भावनाएँ असली है, इनमें नए ज़माने में अक्सर मिल जानेवाली सस्ती मिलावट नहीं है। कलाई काट लेता अपनी ??? रांझणा में कुंदन ने भी काट ली थी। पर फिर भी ज़ोया कहाँ मिली उसे ?? कुंदन ने ठीक ही कहा था -
"हम खून बहाते रहें... तुम आँसू बहाती रहो, साला इश्क़ न हुआ... लाठी चार्ज हो गया।
काश कि तुम होती पास में...... और यूँ होती की और कोई न
होता | सुनो न.... एक बार आ के मेरी नज़रों से देखो तो ज़रा | तुम्हारे इश्क में
मेरा शहर भी गुलाबी हुआ पड़ा है | तुम्हें पता है....... की मेरे शहर में भी एक झील
है, जहां गर्मियों में दूर देश और शहरों के प्रवासी पंछी दिन बिताने आते हैं | तुम
भी प्रवासी चिड़िया की तरह उड़ के आ जाओ न...... हम झील के किनारे साथ बैठ कर गर्मी
की शामें बिताएंगे | J
#सफ़रनामा_इश्क़_का