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Tuesday, 10 February 2015

हाँ मैं अनार्किस्ट हूँ !

जी बिलकुल ठीक पढ़ रहे हैं आप, बीजेपी के सबसे बड़े लड़ैया प्रधानमन्त्री मोदी के कथनानुसार जिन्होंने दिल्ली की अपनी रैली में कहा था, क्या आप एक अनार्किस्ट को अपना मुख्यमंत्री चुनेंगे ? इसके ठीक उलट दिल्ली की जनता ने एक अनार्किस्ट को अपना मुख्यमंत्री मान लिया और अरविन्द केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को पांच साल के लिए सरकार चलाने की मांग को स्वीकार कर लिया है | आम आदमी पार्टी 67 सीटों के साथ न केवल दिल्ली विधानसभा चुनावों में विजयी रही है, बल्कि इतने बड़े जनादेश के साथ एक इतिहास भी रच दिया है | बीजेपी मात्र 3 सीटों पर सिमट के रह गयी है इसीलिए शायद उसे विपक्ष का दर्जा भी न मिले | और कांग्रेस का तो खाता भी नहीं खुला, शायद मोदीजी जनधन योजना में कांग्रेस का खाता खुलवाकर दर्द कुछ कम कर सकें |

थोड़ा फ्लैशबैक में चलते हैं | तारीख 8 दिसंबर 2013 | आज की ही तरह दिल्ली विधान सभा चुनाव के रुझान आने लगे थे | हम भी टीवी पर लगे हुए थे | लाइव रिपोर्टिंग चल रही थी | जैसे ही आम आदमी पार्टी की किसी सीट के जीतने की खबर आती, आम आदमी पार्टी के कार्यालय के बालकनी में खड़े केजरीवाल, कुमार विश्वास आदि नेता और कार्यालय के बाहर खडी जनता में ख़ुशी की लहर दौड़ जाती, और जनता ख़ुशी से झूमने, नाचने लगती | तमाम सर्वे को धता बताते हुए आप 28 सीटें ले आई | वह जीत अप्रत्याशित थी, लेकिन यह नहीं है | लगभग 1 साल बाद आज भी वही नज़ारा है | पटेलनगर के पार्टी कार्यालय के बालकनी में खड़े कुमार विश्वास, संजय सिंह, आशुतोष आदि नेताओं के चेहरे पर वही ख़ुशी के भाव हैं, और इस बार तो ज्यादा ही क्योंकि जनता ने उन्हें स्पष्ट बहुमत दे दिया है, और अल्पमत की सरकार की मजबूरियां अब नहीं रही |
बीजेपी की हार की वजहों पर बहुत लोग बहुत कुछ लिख रहे होंगे, पर मेरे दृष्टिकोण से भारतीय जनता पार्टी की हार की 5 प्रमुख वजहें हैं | गौर कीजियेगा |

1. लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद दिल्ली विधानसभा का चुनाव न कराना |

लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद चुनाव न कराने की वजह से केजरीवाल को लगभग 10 महीनो का बड़ा वक़्त मिल गया | इन 10 महीनो में अरविन्द ने घर-घर जाकर, कैम्पेन कर अपनी पार्टी को फिर से मज़बूत कर लिया, एक तरह से कहिये की आप ने डैमेज कंट्रोल कर लिया | साथ ही अरविन्द केजरीवाल ने अपने इस्तीफ़ा देने पर हर एक चुनावी सभा में सार्वजनिक रूप से माफ़ी भी मांगी | इससे वह जनता भी फिर से आप के साथ हो गयी, जो कहीं न कहीं केजरीवाल के इस्तीफ़ा देने पर उनसे नाराज़ थी |

2. बीजेपी का बड़े लोगों की पार्टी दिखना

आप मानिए न मानिए बीजेपी लोकसभा चुनावों की जीत के बाद बड़े लोगों की पार्टी दिख रही है | छोटे-छोटे मुद्दे गौण हो चुके हैं | ज़मीन हकीकत से इतर बड़ी-बड़ी बातें होती हैं, हमारे प्रधानसेवक की इसमें मास्टरी है | बुलेट ट्रेन की बात की जाती है, स्मार्ट सिटी, वर्ल्ड क्लास सिटी की बात की जाती है, जबकि हमारी राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ही मूलभूत सुविधाओं जैसे बिजली, पानी, शौचालय इत्यादि समस्याएँ है | बीजेपी इन सब चीज़ों को नहीं समझ पायी की जनता सिर्फ एक साधारण सा शहर चाहती है, जिसमे उसके मूलभूत सुविधाओं के मिलने में कोई दिक्कत न हो सके | जनता की इसी नब्ज़ को अरविन्द केजरीवाल ने पहचाना |  इससे तमाम मिडिल क्लास, अपर मिडिल क्लास, और निचले तबके के लोग आप के साथ हो लिए |

3. प्रधान सेवक का केजरीवाल पर नेगेटिव हमला

आप लोगों को वो मोदीजी के दिल्ली रैली का वो दृश्य तो याद ही होगा, जिसमे हमारे पीएम साहब केजरीवाल पर यह कहकर प्रहार कर रहे हैं की अगर आप अनार्किस्ट हैं, तो जंगल चले जाइये | नक्सलियों के साथ रहिये | और बगल में बैठे अमित शाह और सतीश उपाध्याय मोदीजी के इस बयान पर हंस रहे हैं | यही नहीं पूरी बीजेपी पार्टी केजरीवाल पर लगातार व्यक्तिगत हमले करती रही | लगातार उन्हें भगोड़ा, बन्दर, नक्सली, उपद्रवी, धोखेबाज़, खांसने वाले कहती रही | इससे बीजेपी के प्रति गलत सन्देश जनता में गयी |

4. आम आदमी पार्टी के पास जेन्युइन नेताओं और कार्यकर्ताओं की फौज

यह एक बहुत बड़ी वजह रही आम आदमी पार्टी के चुनाव जीतने की | लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद ही आम आदमी पार्टी के सभी कार्यकर्ता और नेता अपने इस महामिशन पर लग गए थे, और इसके उलट बीजेपी का लोकसभा चुनावों में जीत का हैंगओवर अभी तक उतरा नहीं था | आम आदमी पार्टी के सभी कार्यकर्ता बिना किसी शोर-शराबे के चुपचाप अपने काम में लग गए | घर-घर जाकर अपनी पार्टी के लिए कैमपेन किया | एक बार नहीं 3-3, 4-4 बार लोगों के घरों में जाकर अपनी पार्टी के एजेंडे बताये, उन्हें कन्विंस किया | अगर ऐसा कहें की आम आदमी पार्टी अपने समर्पित कार्यकर्ताओं के वजह से ही चुनाव जीती है, तो अतिश्योक्ति नहीं होगी | सभी पार्टियों को भी मालूम है की ऐसे समर्पित कार्यकर्ता पैसे देकर खरीदे नहीं जाते |

5. केजरीवाल की ईमानदार छवि

अरविन्द केजरीवाल की इमानदार छवि भी जीत का एक प्रमुख कारण रही | 67 सीटें ले आना यह बताता है की जनता किस कदर अरविन्द पर मोहित हो चुकी थी | मन ही मन उन्हें ये मफलर ओढ़े, खांसने वाला सीधा-सादा आम आदमी अपने नायक के रूप में पसंद आ गया था | बीजेपी के उलट अरविन्द ने नेगेटिव राजनीति नहीं की | अपने एजेंडों को जनता को समझाया, एक नयी तरह की राजनीती की शुरुआत अरविन्द ने की है |  इसलिए पूरी दिल्ली ने मुख्यमंत्री के रूप में उनके नाम की मुहर लगा दी |

आम आदमी पार्टी के लिए हैप्पी एंडिंग यही नहीं होगा, जनता ने उनपर इतना प्यार जो लुटाया है, इतना बड़ा जनादेश जो दिया है, उसका क़र्ज़ जनता को किये वादों को पूरा करके अरविन्द को चुकाना होगा | आम आदमी पार्टी की जीत सिर्फ दिल्ली की जीत नहीं बल्कि आने वाले समय में एक नयी तरह की राजनीती की सुगबुगाहट भी है | खैर आने वाले वक़्त में देखना होगा की क्या एक स्वच्छ और स्वस्थ राजनीती का पदार्पण दिल्ली से भारत की राजनीती में हो चूका है ? शुभ प्रभात |